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Framing & LumberIRC / IBC मानक फॉर्मूलेत्वरित गणना

इंसुलेशन और R-वैल्यू कैलकुलेटर

छत, दीवार और फर्श के लिए आवश्यक थर्मल R-वैल्यू, ग्लास वूल/रॉकवूल पैकेट, ब्लो-इन सेलूलोज़ और स्प्रे फोम की सटीक गणना करें।

2026 लागत डेटा और कोड मार्गदर्शनलाइव इंपीरियल और मेट्रिक रूपांतरणत्वरित PDF और प्रिंट विनिर्देश निर्यात
तकनीकी गाइड और कार्यप्रणाली

इंसुलेशन और R-वैल्यू कैलकुलेटर — तकनीकी विनिर्देश और संदर्भ गाइड

सत्यापित उद्योग मानक

इंसुलेशन कैलकुलेटर

इस टूल से छत, दीवार या फ़र्श पर लगने वाले इंसुलेशन की मात्रा निकलती है - ज़रूरी मोटाई, ख़रीद का क्षेत्रफल, बैट के पैकेट, ब्लोन-इन के बैग, स्प्रे फ़ोम के बोर्ड फुट और मोटी लागत।

कैलिब्रेशन की चेतावनी। लक्ष्य R-मान IECC 2021 / IRC Table N1102.1.3 के अमेरिकी क्लाइमेट ज़ोन 1 से 8 से आते हैं, फ़्रेमिंग फ़ैक्टर 2x4 और 2x6 लकड़ी के स्टड मानकर लगता है, और पैकेट की कवरेज अमेरिकी उत्पादों की है। भारत का ढाँचा RCC फ़्रेम + ईंट या AAC ब्लॉक होता है, यहाँ स्टड कैविटी ही नहीं होती, और नियम ECBC 2017 तथा आवासीय के लिए ECO निवास संहिता से आते हैं - जो R-मान नहीं, U-मान और RETV (W/वर्ग मीटर-K) में बात करते हैं।


सामग्री, R-मान और भारत में उपलब्धता

सामग्री R प्रति इंच RSI प्रति 25 मिमी भारत में स्थिति
ग्लास वूल रोल 3.1 से 3.4 0.55 से 0.60 आसानी से, 24 से 48 किग्रा/घन मीटर
रॉकवूल (मिनरल वूल) 3.8 से 4.2 0.67 से 0.74 उपलब्ध, आग-रोधी
EPS यानी थर्मोकोल बोर्ड 3.6 से 4.0 0.63 से 0.70 सबसे सस्ता, ओवरडेक में आम
XPS बोर्ड 5.0 0.88 ओवरडेक और बेसमेंट में
क्लोज़्ड-सेल स्प्रे फ़ोम 6.5 से 7.0 1.14 से 1.23 महँगा, ठेकेदार गिने-चुने
PUF या पॉलीआइसो पैनल 6.0 से 6.5 1.06 से 1.14 कोल्ड स्टोरेज और शेड में
सेल्युलोज़ ब्लोन-इन 3.6 से 3.8 0.63 से 0.67 लगभग नहीं मिलता

टूल का बैग-गिनने वाला हिसाब सेल्युलोज़ और ब्लोन फ़ाइबरग्लास मानकर बना है, जो भारतीय बाज़ार में नदारद हैं; यहाँ का असली मुक़ाबला EPS, XPS और ग्लास वूल के बीच है और वे वर्ग मीटर तथा मिलीमीटर मोटाई में बिकते हैं, बोर्ड फुट में नहीं।


गणना का क्रम

1. कुल क्षेत्रफल     = लंबाई x चौड़ाई
2. ख़रीद क्षेत्रफल   = कुल क्षेत्रफल x (1 + बरबादी प्रतिशत / 100)
3. ज़रूरी मोटाई      = (लक्ष्य R - मौजूदा R) / प्रति इंच R
4. बैट के पैकेट      = ख़रीद क्षेत्रफल / प्रति पैकेट कवरेज
5. बोर्ड फुट         = ख़रीद क्षेत्रफल x मोटाई (इंच)
6. मीट्रिक में बदलें  = RSI = R x 0.1761
                       U-मान = 1 / RSI

उदाहरण। 93 वर्ग मीटर (1,000 वर्ग फुट) की छत को R-38 तक ले जाना है और मौजूदा R-मान शून्य है। सेल्युलोज़ से 8 प्रतिशत बरबादी जोड़कर लगभग 57 बैग बैठते हैं। वही काम EPS से करना हो तो 38 / 3.8 यानी 10 इंच, यानी 250 मिमी मोटाई - जो सपाट RCC छत पर व्यावहारिक नहीं। इसीलिए भारत में छत पर 50 से 75 मिमी XPS रखकर उसके ऊपर ब्रिक-बैट कोबा या टाइल की परत डाली जाती है।


भारत में तीन बड़े फ़र्क़

  1. यहाँ गर्मी अंदर आने से रोकनी है, अंदर की गर्मी बचानी नहीं। अमेरिकी तालिका हीटिंग-प्रधान जलवायु के लिए बनी है, इसलिए वहाँ दीवार की कैविटी और वेपर बैरियर पर ज़ोर है। भारत के हॉट-ड्राई, वॉर्म-ह्यूमिड और कंपोज़िट ज़ोन में सबसे बड़ा फ़ायदा छत से मिलता है, उसके बाद पश्चिमी दीवार और शेडिंग से। ठंडे इलाक़े यानी लेह, शिमला, गंगटोक ही अपवाद हैं।
  2. फ़्रेमिंग फ़ैक्टर बेमानी है, दीवार की सामग्री ही इंसुलेशन है। 230 मिमी ईंट की चालकता लगभग 0.81 W/mK है, जबकि AAC ब्लॉक की 0.16 के आसपास - यानी ब्लॉक बदलकर ही आधा काम हो जाता है, बिना कोई अलग परत लगाए।
  3. वेपर बैरियर का नियम उलटा पड़ सकता है। ठंडी जलवायु में बैरियर अंदर की तरफ़ लगता है। नमी वाले भारतीय तट पर अंदर की ओर Class I बैरियर लगाने से AC वाले कमरे की दीवार में नमी फँस जाती है। यहाँ ज़्यादा काम की चीज़ हवा का रिसाव रोकना और छत पर परावर्तक (कूल रूफ़) फ़िनिश है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

छत पर कितनी मोटाई रखनी चाहिए?

व्यावहारिक चलन 50 मिमी XPS या 75 मिमी EPS है, जो लगभग R-10 से R-11 देता है। यह अमेरिकी R-38 के मुक़ाबले कम लगता है, पर भारत में सवाल सर्दी में गर्मी बचाना नहीं बल्कि दोपहर की धूप से आने वाली गर्मी घटाना है।

R-मान को U-मान में कैसे बदलें?

R को 0.1761 से गुणा करने पर मीट्रिक RSI मिलता है और उसका उल्टा U-मान होता है। उदाहरण के लिए R-13 का मतलब RSI 2.29 और U लगभग 0.44 W/वर्ग मीटर-K। ECO निवास संहिता और ECBC इसी U-मान तथा RETV में शर्त लिखते हैं, इसलिए टूल का नतीजा इस रूप में बदलकर ही स्थानीय नियम से मिलाइए।

पुराने इंसुलेशन के ऊपर नया लगा सकते हैं?

हाँ, बशर्ते पुरानी परत सूखी हो और चूहे या सीलन से ख़राब न हुई हो। ऊपर बिना काग़ज़ वाली (अनफ़ेस्ड) परत ही रखिए, वरना दो परतों के बीच नमी फँसेगी। और बैट को दबाकर ठूँसना बेकार है - दबने पर हवा के ख़ाली ख़ाने ख़त्म हो जाते हैं और असली R-मान गिर जाता है।

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