बर्फ़ भार (स्नो लोड) कैलकुलेटर
यह टूल छत पर जमी बर्फ़ का डिज़ाइन भार निकालता है - सपाट छत का pf, ढलान के बाद ps, न्यूनतम pm, और छत के क्षेत्रफल पर कुल भार किलो या टन में। ऊँची छत से उड़कर नीचे जमा होने वाली बर्फ़ यानी ड्रिफ़्ट का हिसाब भी अलग मिलता है।
कैलिब्रेशन की चेतावनी। गणना ASCE/SEI 7-22 अध्याय 7 और IBC 1608 पर चलती है, और ज़मीन का बर्फ़ भार pg अमेरिकी नक़्शों से लिया जाता है। भारत में इसका समकक्ष IS 875 भाग 4 है, जिसका ढाँचा ही अलग है - वहाँ Ce, Ct और Cs जैसे अलग-अलग गुणक नहीं, बल्कि एक शेप गुणक μ चलता है। और सबसे बड़ी बात: भारत में बर्फ़ भार केवल हिमालयी पट्टी में मायने रखता है - जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल, उत्तराखंड, सिक्किम, अरुणाचल और दार्जिलिंग जैसे ऊँचे इलाक़े। मैदान में यह ख़ाना शून्य ही रहेगा।
ASCE का गुणक और IS 875 भाग 4 का समकक्ष
| ASCE 7-22 का गुणक | मान | IS 875 भाग 4 में |
|---|---|---|
| 0.7 (ज़मीन से छत तक) | तय | अलग गुणक नहीं, μ में समाया हुआ |
| Ce - खुलापन | 0.9 / 1.0 / 1.2 | अलग गुणक नहीं |
| Ct - तापीय स्थिति | 1.0 / 1.2 / 1.3 / 0.85 | अलग गुणक नहीं |
| Is - महत्ता | 0.8 / 1.0 / 1.1 / 1.2 | महत्ता IS 1893 में अलग से आती है |
| Cs - ढलान की छूट | 30 डिग्री के बाद घटता | μ ही 30 डिग्री के बाद घटता है |
| pm - न्यूनतम भार | Is x 20 psf | छत की लाइव लोड IS 875 भाग 2 से |
यानी दोनों संहिताएँ एक ही भौतिकी को अलग तरह से बाँटती हैं। ASCE खुलापन, गरमाहट और महत्ता को तीन अलग गुणकों में गिनता है, जबकि IS 875 भाग 4 सारा फ़र्क़ एक μ में समेटकर बाक़ी सुरक्षा IS 456 के लोड फ़ैक्टर पर छोड़ देता है। इसलिए दोनों के नतीजे सीधे मिलाकर देखना ठीक नहीं।
दोनों तरीक़ों का गणित
ASCE 7-22
pf = 0.7 x Ce x Ct x Is x pg
ps = Cs x pf
भार = अधिकतम(ps, pm)
कुल = भार x छत का क्षेत्रफल
IS 875 भाग 4
S = μ x s0
μ = 0.8 (ढलान 0 से 30 डिग्री)
μ = 0.8 x (60 - ढलान) / 30 (ढलान 30 से 60 डिग्री)
μ = 0 (ढलान 60 डिग्री से ऊपर)
उदाहरण। pg = 35 psf (1.68 kPa), Ce और Ct तथा Is सब 1.0, ढलान 6 इन 12 यानी 26.6 डिग्री, ऊपर ऐस्फ़ाल्ट शिंगल। pf = 0.7 x 35 = 24.5 psf (1.17 kPa), ढलान 30 डिग्री से कम है इसलिए Cs = 1.0 और ps भी 24.5 psf। 186 वर्ग मीटर (2,000 वर्ग फुट) की छत पर कुल भार 22,200 किग्रा यानी लगभग 22 टन।
वही छत IS 875 भाग 4 से देखें तो μ = 0.8 लगेगा, यानी ज़मीन के भार का 80 प्रतिशत - ASCE के 70 प्रतिशत से ज़्यादा। बर्फ़ के घनत्व पर भी ध्यान दीजिए: ताज़ी बर्फ़ 80 से 320 किग्रा प्रति घन मीटर होती है, पर गीली और दबी बर्फ़ 480 से 960 तक पहुँच जाती है, इसलिए एक रात की बरसाती बर्फ़ पूरे हिसाब को उलट सकती है।
भारत में तीन बातें अलग हैं
- मैदान में छत का असली दुश्मन बर्फ़ नहीं है। दिल्ली, लखनऊ, नागपुर या चेन्नई में यह गणना बेमानी है। वहाँ सपाट RCC छत पर निर्णायक भार IS 875 भाग 2 की लाइव लोड (पहुँच वाली छत पर 1.5 kN/वर्ग मीटर), मानसून में पानी का जमाव, और GI शीट की छत पर IS 875 भाग 3 का हवा से उठने वाला अपलिफ़्ट है। शीट की छतें बर्फ़ से नहीं, आँधी से उड़ती हैं।
- पहाड़ में बर्फ़ अकेली नहीं आती। हिमालयी पट्टी का बड़ा हिस्सा IS 1893 के भूकंप ज़ोन IV और V में है, इसलिए वहाँ बर्फ़ भार, भूकंप और ढलान वाली ज़मीन तीनों साथ जाँचने पड़ते हैं। ऊँचाई के साथ s0 तेज़ी से बढ़ता है और 2,000 से 2,500 मीटर के ऊपर यही भार छत का ढाँचा तय करता है।
- ढलान की रणनीति यहाँ ज़्यादा काम की है। पहाड़ी मकानों पर CGI शीट की तेज़ ढलान वाली छत इसीलिए चलती है कि बर्फ़ टिके ही नहीं - IS 875 भाग 4 में 60 डिग्री से ऊपर μ शून्य हो जाता है। साथ में स्नो गार्ड, चौड़ा ओवरहैंग और अंडरडेक इंसुलेशन ज़रूरी हैं, वरना आइस डैम बनकर पानी अंदर आता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या मुझे भारत में बर्फ़ भार गिनना ही पड़ेगा?
अगर साइट हिमालयी पट्टी के बाहर है तो नहीं; वहाँ IS 875 भाग 2 की लाइव लोड और भाग 3 की हवा ही निर्णायक हैं। पहाड़ में हाँ, और वहाँ आंकड़ा स्थानीय PWD या मौसम विभाग के रिकॉर्ड से लीजिए, अमेरिकी नक़्शे से नहीं।
ज़मीन का बर्फ़ भार s0 कैसे निकालें?
यह बर्फ़ की जमा हुई गहराई गुणा उसके औसत घनत्व से आता है, इसलिए दोनों आंकड़े स्थानीय रिकॉर्ड से चाहिए। अंदाज़े के लिए दबी हुई बर्फ़ का घनत्व लगभग 300 किग्रा प्रति घन मीटर मानने का चलन है, पर डिज़ाइन के लिए इतने मोटे अनुमान पर मत जाइए - स्ट्रक्चरल इंजीनियर से मान तय कराइए।
ड्रिफ़्ट यानी उड़कर जमा होने वाली बर्फ़ क्यों ख़तरनाक है?
ऊँची छत के पीछे या पैरापेट की आड़ में हवा बर्फ़ को एक जगह ढेर कर देती है, और वहाँ का भार औसत से कई गुना हो जाता है। ASCE इसे hd, pd और w के सूत्रों से गिनता है; IS 875 भाग 4 भी असंतुलित जमाव की शर्त रखता है। छत गिरने के हादसे लगभग हमेशा इसी ढेर से होते हैं, समान रूप से फैली बर्फ़ से नहीं।